दिल्ली,देश,दुनिया—सत पाल
उपवास उत्सव
हमारी दिल्ली जो भी काम करती है, जो भी संकल्प लेती है या जो भी करने का मन बनाती है उसे पूरी शिद्दत, हिम्म्त से करती है। उसका खूब दिखावा भी करती है ताकि सनद रहे, याद रहे।  इन दिनों किसी न किसी मुद्दे पर उपवास रखने की होड़ लगी है। दिल्ली जैसे महानगर में मुद्दे की तलाश करना कठिन नहीं है। आप कोशिश करें कोई न कोई मुद्दा तो हाथ लग जायेगा। उपवास  से ख्याति पानी है या किसी लम्बी पारी की शुरुआत करनी है तो आप कॉलोनी, दिल्ली, देश या संसार के किसी भी मुद्दे को अपना सकते है। एक दिन देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष ने अपने साथियों के साथ राजधाट पर कुछ घंटों का उपवास रखा। यह वही राजधाट है जहां वह महामानव सुकून से अपनी साधना में लीन हैं जिनका राजकाज से कोई लेना देना नहीं था। अध्यक्ष महोदय दूर से आये इसलिये देर से आये मगर उन्होंने बहुत आदर, सम्मान और निष्ठा के साथ राष्ट्रपिता की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रार्थना की । यह नहीं मालूम कि उन्होंने  महात्मा से कौन सा संकल्प पूरा होने का आशीष मांगा मगर दलितों के दमन के मुद्दे पर रखे उपवास में सारगर्भित विचार रखे। अध्य़क्ष जी के कुछ प्रिय साथियों ने उपवास से पहले उस तरह भर पेट खाने चबाने की कसरत की जैसे महिलायें करवा चौथ व्रत से पहले अंधेरे में पेट पूजा कर लेती हैं। इसके बाद वर्तमान में सबसे बड़ी पार्टी ने अपने कद के अनुरूप देश भर में उपवास रखा जिसमें संसद के बैठे रहने यानी नहीं चल पाने के कारणों की निंदा की गयी। दिल्ली में कई दर्जन स्थानों पर उपवास का भव्य आयोजन हुआ, मीडिया के लिये रौनक लगी रही। दिल्ली की नयी पार्टी के संयोजक ने  घोषित उपवास नहीं रखने का फैसला किया शायद उन्हें लगा होगा कि कुछ दिन में सीलिंग का मसला अतीत बन जायेगा ।वैसे भी जुझारू नेता कहां एक जगह पर जम कर बैठ सकते हैं। देश भर में दौरा करना होता है। दिल्ली में बड़े बड़े गांधीवादी भी उपवास करते हैं। दिल्ली महिला आयोग की गंभीर अध्यक्षा दुष्कर्म के मामलों में कड़े कानून बनाने की मांग को लेकर उपवास पर हैं। उनका संकल्प नेक दिखता है, भगवान उन्हें कामयाबी दे।
गुरु का क्या होगा
क्रिकेट के धमाकेदार बल्लेबाज, लॉफ्टर शो के जानदार कलाकार और वर्तमान में  प्रदेश के मंत्री 30 साल पुराने अदालती मामले के भंवरजाल में हैं। 1988 में रोडरेज में किसी आदमी पर हाथ चलाने के बाद उसकी मौत हो जाने के गैर इरादतन हत्या के मामले में निचली अदालत ने उन्हें बरी किया था।  प्रदेश सरकार ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, इस कोर्ट ने लॉफ्टर शो के बादशाह को तीन साल की सजा सुनायी।  इस के बाद  कलाकार ने सुप्रीम कोर्ट में सजा रद्द करने की अपील की। प्रदेश के सरकारी वकील ने सुप्रीम कोर्ट में सजा बरकरार रखने की राय रखी है। आगे क्या होगा खुदा जाने मगर सरकार  शायद वकील की राय से मुतफिक बतायी जा रही है।
अब फैशन शो
सउदी अरब मे औरतों के लिये पाबंदियां में धीरे धीरे ढील दी जा रही है। उन्हें कार चलाने और सिनेमा देखने की इजाजत मिलने के बाद फैशन शो में शामिल होने की भी मंजूरी दे दी गयी। देश के सबसे पहले फैशन शो में औरतों ने कैट वॉक में चेहरा दिखाते हुये पूरी नजाकत के साथ भाग लिया। वक्त बदल रहा है।   

रिंग रेल का श्रृंगार
थकी, सहमी, भूली, बिसरी दिल्ली रिंग रोड जवान बनने वाली है, इसका श्रृंगार, निखार,सुधार, नया अवतार होने वाला है। 1975 में केवल माल ढुलाई के लिये शुरू की गयी रिंग रेल को 1982 में एशियाड  से पहले बहुत ऑक्सीजन दे कर यात्रियों की सेवा के लिये खोल दिया गया और इसके लिये नेहरू स्टेडियम के नजदीक के स्टेशनों- लाजपत नगर, लोदी कॉलोनी, सरोजनी नगर, सफदरजंग और चाणक्यपुरी का 53 करोड़ रुपये  की लागत से कायाकल्प कर 21 स्टेशनों के लिये 35 किमी पर रिंग रेल दौड़ने लगी। दौड़ती रही मगर सफेद हाथी बन गयी, यात्रियों की दैनिक संख्या केवल 3700 ही रही। इसका किराया सबसे सस्ता है लेकिन ये यात्रियों को मझधार में छोड़ती है क्योंकि कनैक्टिंग सेवाओं के लिये सरकार ने चिंतन, मनन नहीं किया। अब सरकार जागी है और इसने रिंग रेल के पूरे रूट का कायाकल्प करने का फैसला लिया है। इससे सुनसान, भयावह  रूट गुलजार होगा और यात्रियों की तादाद तेजी से बढ़ेगी। दरअसल 21 में से 17 स्टेशनों और इस रेल की पटरियों के दोनों ओर व्यावसायिक दृष्टि से विकास किया जायेगा जिससे रिंग रेल का मार्ग लुभावना और कमाऊ बनेगा। रिंग रोड के मार्ग पर दिल्ली की 231 किलो मीटर लंबी जीवन रेखा- दिल्ली मेट्रो के कई महत्वपूर्ण स्टेशन हैं जो कनैक्टिविटी  बढ़ाने में मददगार बन सकते हैं। विकास के तहत रेल लाइनों के दोनों ओर खाली स्थान पर हरियाली के अलावा व्यावसायिक स्थल, होटल, रेस्तरां, अस्पताल, और रिहायशी बस्तियां और बहुमंजिला फ्लैट बनाये जाने हैं।  ये सब हो जाने से इन इलाकों में रौनक आयेगी, स्टेशनों का कायाकल्प होगा तथा यात्रियों की संख्या में भी काफी वृद्धि होगी। लोग होटलों, रेस्तरां, अस्पतालों, मार्केटों में आने जाने के लिये रिंग रेल में सफर करेंगे और फ्लैटों और घरों में रहने वाले लोग और उनके मित्रों तथा रिश्तेदारों का आना जाना लगा रहेगा। रिंग रेल में सुबह से रात तक यानी आखिरी रेल चलने तक यात्री बढ़ते जायेंगे। रेलों के फेरे बढ़ेगे और रिंग रेल की उदासी समाप्त होगी तथा सफेद हाथी मेट्रो जैसा कमाऊ साबित होगा। सब से अहम है कि दिल्लीवासियों और बाहर से आने वालों को यात्रा का एक सुधरा हुआ माध्यम मिल सकेगा और रिंग रेल के आस पास के बाजारों में भी तो खरीददारों की भीड़ बढ़ेगी और रिंग रेल  का  फायदा होगा।
नायब तहसीलदार की भर्ती
जम्मू कश्मीर में नायब तहसीलदार की भर्ती के लिये आवेदन भरे गये और परीक्षा के प्रवेश पत्र भी भेजे जा रहे हैं। एक गधे के नाम पर भी प्रवेश पत्र जारी हआ है क्योंकि किसी ने गधे के नाम से उसका फोटो लगा कर आवेदन किया था। सोचने की बात है कि गधा बेईमानी नहीं करता, केवल बताये गये रास्ते पर चलता है और काम के बोझ से भी घबराता नहीं तो गधे को यह पद देने में क्यों संकोच किया जाये। यह तो केवल इस आवेदन पर चर्चा के रूप में किया जा रहा है। देश में कई युवकों को फार्म भरने की भी शायद फुर्सत नहीं रहती।
प्रकाश नहीं हुआ


20 वर्ष  तक लाइटर एक व्यक्ति के पेट के भीतर महमान रहा मगर उससे  वहां प्रकाश नहीं हुआ। चीन के सिचुआन प्रांत में एक आदमी को पेट का जबर्दस्त दर्द हुआ, डाक्टर कारण मालूम नहीं कर सके। आखिर ऑप्रेशन किया गया, भीतर से एक लाइटर निकला जो न तो बड़ा न छोटा हुआ। लाइटर  बीस साल  कैदखाने में रहा।  उस आदमी ने बताया कि वह बीस साल पहले गलती से लाइटर निगल गया था और गलती भुला बैठा था।
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शोर
रिकार्डिड संगीत ज्यादा शोर करता है या लाइव संगीत, हो सकता है यह सबसे बड़ा प्रश्न हो मगर दिल्ली सरकार ने एक दिन इसका कुछ जवाब दिया और अगले दिन पहले जवाब से विपरीत जवाब पेश किया। शराब सर्व करने वाले रेस्तरां, पब, होटलों और क्लबों में आने वालों के लिये म्यूजिक पेश  करना इसलिये जरूरी हो गया है क्योंकि दो घंटे तक लगातार लाल परी को सामने रख कर उसे अपने होंठों और गले का प्यार देने के बाद रिंदों के मन में मस्ती प्रदर्शित करने की तमन्ना बढ़ जाती है और उनके कदम और उनका मिजाज लड़खड़ाने लगता है। ऐसे में उनमें लाउड म्यूजिक के धमाके में इसका इजहार करने का ज्वार उबलने लगता है। पीने वालों की असलियत और उनकी वाजिब, गैर वाजिब हरकतें देखने लायक बन जाती हैं। यह तो सत्य है कि संगीत यानि मासूकी को मारा नहीं जा सकता। एक मुगल बादशाह को मासूकी से नफरत थी और वह नहीं चाहता था कि इसकी आवाज सुनाई दे। बादशाह औरंगजेब ने मासूकी को जमीन से बहुत नीचे दफन करा दिया  ताकि ये कभी सामने न आ सके। मगर संगीत आज भी जिंदा है और जिंदा रहेगा, जब तक सूरज चांद रहेगा, मासूकी का इकबाल रहेगा। यह संतोष का सबब है कि सरकार ने मासूकी के वजूद पर कोई सवाल नहीं किया मगर उससे होने वाले शोर को मुद्दा बनाया। शायद उसका मानना था कि रिकार्डिड संगीत से ज्यादा शोर होता है मगर लाइव संगीत से कम। हमारा मानना है कि दोनों तरह के संगीत से लगभग बराबर शोर होता है। अगर दिल्ली सरकार ने इस शोर से जनता को बचाने के लिये फैसले लिये तो इसकी तारीफ की जा सकती है। और अगर पियक्कड़ जमात के हुड़दंग  कम करने के लिये रिकार्डिड संगीत नहीं बजाने की बात की तो उसे समझ लेना चाहिये कि हुड़दंग उनके बस में नहीं होता । ऐसे मदिरालय रिहायशी कालोनियों के बीचोंबीच भी हैं और वहां के निवासियों की रातें डिस्टर्ब होती हैं। अगर इसे देखते हुये सरकार ने फैसला लिया तो उसे रेस्तरां के खुले इलाके में संगीत बजाने पर रोक लगानी होगी और बंद ह़ॉल में संगीत बजता है तो उस हॉल को सांउड प्रूफ बनवाना होगा ताकि स्थानीय निवासियों के सकूं और उनकी नींद में खलल न हो।
बंदर की याद में
रायबरेली के एक दंपत्ति के संतान नहीं थी और उसने प्रताड़ित किये जा रहे एक बंदर को देखा और उसे खरीद कर अपनी संतान की तरह पाला तथा उसे अपनी जान से बढ़ कर प्यार दिया । अपनी सारी जायदाद बंदर यानि चुनमुन के नाम कर दी। बंदर 15 वर्ष के बाद संसार से महाप्रयाण कर गया। दंपत्ति को चुनमुन की याद सताने लगी। उन्होंने अपने  मंदिर में बाल हनुमान के रूप में चुनमुन की सोने की मूर्ति लगवाई और शहर में बेहतरीन सुविधा संपन्न चुनमुन अस्पताल बना कर जनता को समर्पित कर दिया। किसी को अपना बनाने पर उससे कितना लगाव हो जाता है। इससे उत्तम उदाहरण तलाशना कठिन होगा।
फुटबाल का जुनून
किसा भी खेल की दीवानगी में कोई क्या नहीं कर सकता। तुर्की में फुटबाल के मैच के सभी टिकट बिक गये और एक फुटबाल प्रेमी को निराश होना पड़ा। उसने टिकट जुटाने की लाख कोशिशें कीं मगर कोई नतीजा नहीं मिला। उसने किसी भी तरह मैच देखने की ठान ली। उसने एक क्रेन किराये पर ली औऱ उस पर चढ़ के सारा मैच देखा। वह तो मैच का आनंद ले रहा था मगर स्टेडियम में बैठे तमाम दर्शक बार बार केवल उस फुटबाल प्रेमी की दीवानगी देख रहे थे।



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दिल्ली में सिरसा
देश की राजधानी दिल्ली में भी सिरसा जैसा आश्रम पाये जाने पर राष्ट्रीय राजधानी में लोगों में चिंता का आलम बना है। यह चिंता वाजिब है, ऐसी ही चिंता सरकार और पुलिस में भी दिखायी देनी चाहिये ताकि ऐसी घटना दुबारा न होने का भरोसा कायम हो वरना लोगों का व्यवस्था पर से विश्वास समाप्त हो जायेगा। कोई सिरफिरा आपराधिक किस्म का आदमी अपने आप को भगवान राम , शिव शंकर और परमात्मा कहे और कमसिन लड़कियों से अपनी पूजा करने और तन, मन, धन सब समर्पित करने को कह कर देश भर में 80 से अधिक आश्रमों में 16 हजार रानियों के साथ रास लीला करने का खुल्लमखुला संकल्प लेता दिखे तब भी अगर समाज के ठेकेदार और सरकार के तारनहार नहीं जागें तो कहा जायेगा कि हमारे देश की किस्मत खराब है। बिल्कुल सिरसा के डेरा सच्चा सौदा की तरह दिल्ली के एक कथित आध्यात्मिक  आश्रम में हवस के बेहया खेल की खबरें पढ़ कर किसी भी संवेदनशील आदमी को मानसिक आघात पहुंच सकता है।  एक सवाल हम सभी अपने दिलो दिमाग से करें कि आखिर मां बाप क्यों अपनी लड़कियों को अपने कौन से सुनहरे भविष्य की कामना करते हुये अपने कथित गुरु या भगवान के पास भेजते हैं और उन्हें वहां छोड़ कर उनके बर्बाद होने की परवाह किये बगैर बेफिक्र हो कर सो जाते हैं। कई कई साल तक अपने बच्चों का अता पता लेने नहीं आते। वह कथित भगवान एक बार न जाने कौन सी उत्तेजक दवा ले कर एक साथ दर्जन भर बालिकाओं का जीवन नरक बना देता है फिर भी समाज के ठेकेदार उस कथित भगवान का गुणगान करते नहीं थकते। ऐसे आश्रम दौलत के भंडार और एक किस्म की टकसाल बन कर शायद उन सभी लोगों की किसी न किसी तरह संकट के समय मदद करते होंगे, तभी तो शायद समाज के कथित रखवाले ऐसे आश्रमों की गतिविधियों पर से नजर अलग कर लेते हैं। आखिर कब तक ऐसा काला गोरख धंधा चलता रहेगा और बालिकाऐं और महिलाऐं ऐसे धर्म के ठेकेदारों के चंगुल में फंस कर अपनी जिंदगी तबाह करती रहेंगी और सब कुछ लुटा देने के बाद भी उस कथित भगवान को अपना परवरदिगार मानती रहेंगी।
श्मशान में एनीवर्सरी
हमारे देश में अब भी  तरह तरह के अंध विश्वास कायम हैं । क्या कोई अपनी शादी की सालगिरह श्मशान में जा कर आधी रात को मनाना पसंद करेगा, निस्संदेह आप का जवाब नहीं में होगा। महाराष्ट्र के शोलापुर के एक दम्पत्ति ने भूत प्रेत का डर समाप्त करने के लिये अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों  को बुला कर न केवल श्मशान में  केक काट कर शादी की 20वीं सालगिरह मनायी अपितु एक बड़ा भोज भी दिया। ये नहीं मालूम कि उनके भूत वाला डर गया कि नहीं। डर आसानी से तो नहीं जाता, कहीं और किसी अंध विश्वास में न फंस जायें ये जनाब।
शादी की ड्रैस
विदेशों में शादी के समय दुल्हन की सफेद रंग की लंबी ड्रैस बनवाने का रिवाज है। एक  दुल्हन ने अपने लिये 8 किलो मीटर लंबी ड्रैस बनवाई तो उसे चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो उसके लिये भी कुछ ऐसे लोग किराये पर लाने पड़े जैसे कई दशक पहले नवाबों और राजा महाराजाओं की लंबी चौड़ी पोशाक को उनके पीछे से उठा कर चला करते थे। कैसा लगा होगा दूल्हे को ये सब देखते हुये। जरा साचिये। 


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धर्म नगरी
देश की राजधानी दिल्ली कुछ दिन से तेजी से धर्म नगरी बनती जा रही है। भगवान कृष्ण ने कहा था जब जब अधर्म, अन्याय बढ़ेगा तब धर्म का प्रभाव बलवान होगा। अभी दिल्ली में इतना अधर्म और अन्याय तो नहीं बढ़ा कि भगवान श्रीकृष्ण को धर्म का दायरा बढ़ाने के निर्देश देने पड़े मगर यह भी साफ दिख रहा है कि धार्मिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं । कहीं कौरवों तथा पांडवों के बीच होने वाले महाभारत की पटकथा लिखी जा रही है। जंग की बात की जा रही है न कि शांति की। नवरात्र के दिनों में माता के नौ स्वरूपों की श्रद्धा और उल्लास से पूजा अर्चना करने के लिये मंदिर गुलजार हैं और पंडाल सजे हुये हैं। उधर लाल किला मैदान में भी लगता है किसी जवाबी पटकथा के तहत ऱाष्ट्र ऱक्षा यज्ञ शुरू कर दिया गया है। दिल्ली का दिल बदले या नहीं बदले राजधानी का मंजर यानी दृश्य तो बदल रहा है। राष्ट्र की रक्षा को खतरा तो सीमाओं पर है जहां प्रतिदिन गोले चलाये जा रहे है, भारतीय परिवारों का जीना हराम हो रहा है, क्यों न ऐसा रक्षा यज्ञ सीमाओं पर किया जाये ताकि वहां सद्भाव का माहौल बने और दुश्मनी के वातावरण का बिस्तर गोल मिले। दिल्ली के यज्ञ की बात करें तो 25 मार्च तक चलने वाले 108 कुंडीय राष्ट्र रक्षा महायज्ञ की पूरे एन सी आर क्षेत्र में चर्चा है। कहते हैं इस यज्ञ में ढाई करोड़ मंत्रों का जाप किया जायेगा । एक हजार एक सौ ब्राह्मण यज्ञ की कमान संभालेंगे । सभी धार्मिक लोगों को प्रेरणा देने और धार्मिक फील देने के लिये मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की बड़ी बड़ी सुंदर मोहक तस्वीरें भी लगायीं गयी हैं। भारत माता की विशाल तस्वीर भी लगी है।  भीड़ तो बेतहाशा आयेगी क्योंकि चांदनी चौक और लाल किले के इलाके में तो कोई बिना किसी वजह से भाषण देना शुरू कर दे तो बहुत लोग जमा हो जाते हैं। यज्ञ में आई भीड़ में कितने लोगों की भारत की रक्षा के प्रति  चिंता होगी यह कहना कठिन होगा। अगर यज्ञ पर होने वाले खर्च की रकम बेसहारा बच्चों के कल्याण पर लगाई जाये तो शायद ऐसे बच्चे अपराध के दायरे में फंसने से बच सकेंगे।

रिश्वतखोर
कहते हैं ऱिश्वतखोर डरपोक और कमजोर नहीं होता मगर गुजरात में पाटन के पशु अस्पताल का एक डाक्टर दो हजार रुपये की रिश्वत ले रहा था तो उसी समय भ्रष्टाचार रोधी दस्ता आ गया। डाक्टर डर गया और उसने 2 हजार रुपये के नोट को मुंह में डाल कर अच्छी तरह चबा लिया। दस्ते को रिश्वत के सबूत के लिये वही नोट चाहिये मगर दूसरे अस्पताल के डाक्टर पेट से नोट निकालने में नाकाम हैं। लगता है कि नोट तो कचरा बन कर फ्लश में बह गया होगा।
सोने की बरसात
रूस के एक उड़ते कारगो विमान में से सोने, चांदी, प्लेटिनम आदि मंहगी धातुओं की बरसात होती रही और जब विमान के चालक दल को पता चला तो विमान को दूसरे हवाई अड्डे पर उतारा गया और देखा गया कि विमान का एक दरवाजा खुल गया था जिससे 23 हजार करोड़ रुपये मूल्य का सोना चांदी बरसात की तरह बह गया। यह विमान यकूतिया से उड़ा था। कुछ भी हो कुछ लोगों की तो चांदी हो गयी।


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कितनी बार
आखिर कितनी बार हटाया जायेगा दिल्ली की सड़कों, फुटपाथ पर अपने आप किसी भी जगह पर सामान रख कर रोजी रोटी कमाने वालों को और फेरी लगा कर कई वर्षों से काम धंधा करने वालों को। इस बार के अतिक्रमण हटाने के जोरदार, असरदार अभियान में पुरानी दिल्ली यानी खारी बावली से एक दिन में  सैंकड़ों ऐसे लोगों को  हटाया गया  । इसकी मीडिया में भी व्यापक करवेज हुई मगर इससे अगले दिन वही ढाक के तीन पात। हर रोज की तरह अगले दिन वे सभी अपनी रोजी रोटी कमाने के लिये उसी स्थान पर आ कर जम गये क्योंकि  वे तो रोज कमा कर उसी दिन घर चलाने और परिवार का पेट भरने वाले लोग हैं।  इसे  मीडिया ने भी  सचित्र दिखाया। किसी छोटे या बड़े सुधार या परिवर्तन करने में कुछ समय तो लगता है। मानना होगा कि इस बार दिल्ली में अतिक्रमण के खिलाफ गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं। इतना ही नहीं विशेष कार्य बल के निर्देशों के पालन में संबंधित एजेंसियां कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहीं । अगर हर बार की तरह प्रभावित लोग एक या दो दिन के बाद फिर वहीं आ कर जम जायेंगे तो वर्तमान अभियान का क्या कोई मकसद हल होगा। हम सभी इस अभियान का दिल से पूरा समर्थन करते हैं मगर वांछित परिणाम तो मिलने चाहियें। इसके अलावा यह भी इंतजाम होना जरूरी है कि दिल्ली में ऐसा अभियान आखिरी होगा । यह सुनिश्चित करना होगा कि अतिक्रमण हटाया जाये, जहां संभव हो  चरणबद्ध तरीके से, जिससे दिल्ली को साफ सुथरा बनाया जा सके। यह भी समझ आता है कि दिल्ली की वर्तमान तस्वीर के मद्देनजर माननीय अदालत राजधानी को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त करना चाहती  है। यह अधिकांश क्षेत्रों में संभव लगता है अगर  मिले जुले प्रयास जारी रखे जायें। आशा है ऐसा किया जायेगा मगर हर दिन कमाने और हर दिन खाने और परिवार का पालन पोषण करने वालों के लिये  दिल्ली में  जगह जगह पर वेंडिंग क्षेत्र बनाने के पहले के सुझावों पर विचार  किया जाये तो काम आसान हो सकता है। अभियान की कामयाबी के लिये शुभकामनायें।
रचनात्मक सोच
कर्नाटक विधान सभा चुनाव में प्रचार चरम पर है।  एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप, नफरत फैलाने का दुस्साहस, नेताओं के अनर्गल जुबानी विस्फोट, फूट के बीज सींचने के लिये पुराने इतिहास का खंगालना और मजहब को जीत का आधार बनाने का खेल लगातार जारी है। एसे में दूल्हा बन रहे एक युवक ने अपनी रचनात्मक सोच का परिचय दिया है। उसका विवाह होने वाला है और उसने निमंत्रण पत्र पर मतदान के महत्व, निष्पक्ष और शांतिपूर्वक मतदान के लिये निर्वाचन आयोग के सभी निर्देश प्रकाशित किये हैं। निमंत्रण के 95 फीसद भाग पर मतदान बढ़ाने के संदेश हैं और बाकी पर विवाह स्थल, समय, दिन और दोनों परिवारों तथा दूल्हे दुल्हन का नाम है। इस युवक के जज्बे को सलाम।
खाना ले कर आना
ब्रिटेन के दूसरे प्रिंस हैरी का मेगन मर्कल के साथ 19 मई को विवाह हो रहा है। शाही शादी पर 265 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। आखिर 92 साल की महारानी के लिये यह अहम मौका है। 2640 लोगों को आमंत्रित किया गया है। विंडसर कैसल में होने वाले विवाह के लिये 1200 लोगों को पत्र भी भेजे गये हैं। अधिकांश लोगों से कहा गया है कि वे अपना भोजन घर से लायें । केवल 600 लोगों के लिये खाना परोसा जायेगा। कुछ अहम लोगों को इस अवसर पर बुलाया ही नहीं गया। कारण तो ऊपर वाला जाने।
ताजा गजल

मेरा देश बंट रहा है, मार काट से ।
सियासत पनप रही,ठाठ बाठ से ।।

बिदक रही भीड़, हिंसा हुई बुलंद,
भारत करें हैं बंद, ये भेड़ चाल से।

रेल,बस के जलने का दर्द अनसुना
बैठे हैं नेता, कान ‌में सीसा डाल के।


बेखौफ शौक से तोड़ फोड़ कर रहे 
बेलगाम हो रहे वो बिगड़े दिमाग से ।

हाथ में पत्थर, दिल नफरत से लबरेज 
चिंगारी बिखर रही,बेतुके बोलचाल से।

मुद्दे बरस रहे हैं, सच बरसात की तरह
शोलों की फैक्ट्री है चलना संभाल के।

सवाल बन रहे सभी तबाही के बवाल
फूट के सबब न बनें, बचें जंजाल से।

अमन ,खुलुस अब गायब कहीं न हों
कोशिश करें पुरजोर सब देखभाल के।


यह मेरी मौलिक और अप्रकाशित रचना है। मेरी दो फोटो संलग्न हैं।

सत पाल,
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