आँख

आँख

सांच को आंच नहीं कहते हैं.
दो और दो पांच नहीं कहते हैं.
जो नज़र देखते करे घायल
उसे तो आँख नहीं कहते हैं.

1 टिप्पणियाँ:

kya shayri hai, kya andaaz hai.
badhai ho badhai
rajendra prasad

 

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